Category: मजदूर आंदोलन

October 17, 2021 0

नए वेतन समझौते के नाम पर मारुती अस्थाई कर्मचारियों से ₹700 करोड़ सालाना का धोखा

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रवींद्र गोयल (भारत में मजदूरों का बहुलांश (94 प्रतिशत) असंगठित क्षेत्र में ही काम करता है जहाँ  काम की हालत बहुत …

September 11, 2021 0

संघर्ष की रस्मअदायगी से आगे बढ़िए, महानुभावों!

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देश के मजदूर-किसान व आम जनता पर बड़ी इजारेदार पूंजी की गुलामी थोपने वाली मोदी सरकार के विरूद्ध केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा स्वतंत्र फेडरेशनों व एसोसिएशनों के संयुक्त मंच द्वारा ‘9 अगस्त क्रांति दिवस’ को “भारत बचाओ दिवस” के रूप में मनाने का मेहनतकशों से आह्वान

September 11, 2021 0

आवश्यक रक्षा सेवा कानून

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ये कानून जहां तात्कालिक तौर पर मजदूर आंदोलन के अंदर कई तरह की बाधायें खड़ा कर रहे हैं और करेंगे, वहीं दूरगामी तौर पर मजदूर आंदोलन की क्रांतिकारी जमीन को भी ये सिंचित तथा पुष्ट कर रहे हैं। जरूरत है कि मजदूर वर्गीय ताकतें ‘तात्कालिक’ में ‘दूरगामी’ के बीज बोने में सक्षम हों और मोदी सरकार हमें मजदूर आंदोलन में इसके लिए (तात्कालिक से दूरगामी को जोड़ने के लिए) जो उत्तम अवसर दे रही है उसे दोनों हाथों से थाम लेने की है। जाहिर है, हम अगर पूरे परिदृश्य को तात्कालिकता की नजर से नहीं, समग्रता में देखना शुरू कर देते हैं तो हम जल्द ही देखेंगे कि आज की मायूसी खत्म हो रही है, मजदूर आंदोलन का नया सूर्य चमक रहा है और इससे पूरे समाज में एक नया ज्वारभांटा उठ रहा है।

September 11, 2021 0

खोरी बस्ती ढह चुकी है, मी लॉर्ड!!

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देश के सारे संसाधन चंद हाथों में सिमटते जा रहे हैं, पूंजी के पहाड़ संख्या में कम लेकिन दैत्याकार होते जा रहे हैं। अर्थनीति के अनुरूप ही सत्ता का राजनीतिक स्वरूप भी तेज़ी से राज्यों के हाथों से निकलकर केंद्र के हाथों में केंद्रीकृत होता जा रहा है। ‘हम दो – हमारे दो’ का नारा संसद से सडकों, किसान आन्दोलनों तक फैलता जा रहा है। क्रांतिकारी राजनीति का दावा करने वालों का, लेकिन, इस वस्तुस्थिति से बे-खबर, वही ‘अपनी ढपली-अपना राग’ यथावत ज़ारी है।