राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना

राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना

September 13, 2021 0 By admin

पूंजीपतियों के पौ बारह

एम असीम


मोदी सरकार ने आधारभूत ढांचे के निर्माण पर खर्च के लिए 6 लाख करोड़ रुपये धन जुटाने हेतु पहले से निर्मित सार्वजनिक संपत्ति – सड़कों, रेलवे, टेलीकॉम ढांचे, होटल, आदि के मौद्रीकरण की योजना घोषित की है। इसमें से शब्दजाल को हटा दें तो वास्तव में सरकार क्या करने जा रही है?

वास्तव में होना यह है कि पूंजीपति सरकार को अभी एकमुश्त रकम देगा जिसके बदले कोई विशिष्ट सार्वजनिक संपत्ति 25 साल के लिए संचालित कर दुहने का अधिकार उसे मिल जायेगा। इस अवधि में उस संपत्ति से अर्जित की जा सकने वाली समस्त आय पर उसका अधिकार होगा। अर्थात पूंजीपति सरकार को कर्ज दे रहा है जिसके बदले में सरकार सार्वजनिक संपत्ति को कब्जे सहित उसके पास रेहन (mortgage with possession) रख रही है। आम तौर पर मकान या खेत रेहन रखते हैं तो कब्जा कर्जदाता को नहीं देते, सिर्फ कर्ज न चुकाने पर कब्जा सूदखोर को मिलता है, क्योंकि आम तौर पर कर्ज लेने वाले के पास कुछ आमदनी है जिससे उसे कर्ज चुका देने का भरोसा होता है। रेहन के साथ कब्जा देने वाला कह रहा है मैं दिवालिया हूं, कर्ज नहीं चुका सकता, तू कर्ज दे और इस संपत्ति से जो कमा सकता है वो तेरा। सरकार अभी यही कर रही है, क्योंकि पूरे देश की जीडीपी अर्थात आय के बराबर कर्ज में वह पहले ही डूबी है।

कर्ज देने वाले पूंजीपति के लिए इससे अधिक फायदे का सौदा और क्या हो सकता है! इसे समझना है तो एकमुश्त रकम की गणना के तरीके को समझना होगा। आइये देखते हैं:

सबसे पहले, यह हिसाब लगाया जायेगा कि रेहन की अवधि (25 साल मान लें) में हर साल इस संपत्ति से कितनी कमाई की उम्मीद है। मान लीजिए कोई सडक है तो पहले साल से 25वें साल तक सालाना कितने वाहन चलेंगे, टोल की दर कितनी होगी और हर साल कुल नकद कितना मिलने की संभावना है। एक बडा घपला तो इसे तय करने में ही हो जायेगा – यह जितना कम माना जाये पूंजीपति को उतना अधिक मुनाफा होगा। बाद में एकाधिकार होने पर पूंजीपति इन वसूली दरों को बढ़ा कर अपना मुनाफा और अधिक बढ़ सकेगा।

दूसरे, इस रकम का वर्तमान या आज का मूल्य निकाला जायेगा। इसके लिए डिसकाउंट रेट या ब्याज दर के हिसाब से भविष्य की रकम आज कितनी होगी, इसकी गणना की जाएगी। याद रहे पूंजीपति हमारी आपकी तरह इस गणना में बैंक ब्याज दर नहीं

लगायेगा बल्कि सकारात्मक वास्तविक ब्याज दर अर्थात (महंगाई दर + ब्याज दर) पर भविष्य में मिलने वाली रकम को घटा आज की रकम निकालेगा। इसको ऐसे समझ सकते हैं – अगर आज 100 रु 10% ब्याज पर एक साल के लिए जमा किए जायें तो साल भर बाद 110 रु होंगे। इसका उलटा करें तो साल भर बाद के 110 रु का आज का मूल्य 10% ब्याज दर होने से 100 रु होगा। इसी प्रकार पूरे 25 साल का हिसाब लगाया जायेगा।

तीसरे, इस पर अपना परिचालन/मेंटेनेंस खर्च और मुनाफे का मार्जिन घटा कर पूंजीपति एकमुश्त रकम का ऑफर देगा। अमूमन यह संपत्ति पर कुल आय का एक चौथाई तक आयेगी।

लब्बोलुआब यह कि सरकार 6 लाख करोड़ रुपये एकत्र करना चाहे तो तो उसे संभवतः 25 लाख करोड़ रु आय की संपत्ति का मौद्रीकरण करना होगा। इससे सरकार सेंट्रल विस्टा, बुलेट ट्रेन, वगैरह वगैरह बनवायेगी। इनके ऑर्डर भी इन्हीं पूंजीपतियों को मिलेंगे और इनका मुनाफा और बढ़ जायेगा।

पर इन संपत्तियों से जो आमदनी अभी हो रही थी या भविष्य में होने वाली थी, वह बंद हो पूंजीपति के हाथ में चली जायेगी। सामान्य खर्च चलाने के लिए भी सरकार पर कर्ज और बढता रहेगा और सरकार तरह-तरह के टैक्स लगा जनता से जो वसूली करती है उस पर पूंजीपतियों का अधिकार बढ़ता जायेगा।

इसके जरिये सरकार कुछ चुने पूंजीपतियों को सार्वजनिक संपत्ति पर एकाधिकार कायम करने में भी मदद कर सकती है जैसे हवाई अड्डा निजीकरण में देखा जा चुका है जब सभी हवाई अड्डे एक ही ऑपरेटर अर्थात अदानी को सौंप दिये गए थे।