Headlines

भारत में फासीवाद पर बहस

फासीवाद के विरुद्ध वैचारिक–राजनीतिक एकता एवं व्यवहारिक एकजुटता कायम करें! (जनचेतना यात्रा के बिहार चैप्टर द्वारा जारी पर्चे को संदर्भ में लेते हुए एक त्वरित टिप्पणी) पीआरसीसीपीआई (एमएल) जन चेतना यात्रा के बिहार चैप्टर द्वारा जारी पर्चे में यह बिल्कुल सही बात कही गई है कि आज हमारे देश भारत की पुरानी शक्ल-सूरत कहीं दिखाई…

Read More

गिरती आर्थिक वृद्धि व लाभ दर से तीव्र होते अंतर्विरोध फासीवादी तानाशाही को नग्न रूप लेने की ओर बढ़ा रहे हैं

संपादकीय, दिसंबर 2024 पूंजी का मानवद्रोही चरित्र ही ऐसा है कि उसका संकट उसे हमेशा ही ध्वंसात्मक दिशा में ले जाता है क्योंकि यह विनाश ही उसके लिए एक तात्कालिक राहत लाता है। कोविड के नाम पर निर्मम लॉकडाउन पूंजी के लिए ऐसी ही एक तात्कालिक राहत थी जब आर्थिक गतिविधियों के बंद होने से…

Read More

मजदूर-मेहनतकश वर्ग से आह्वान

फासीवाद के खतरे को पहचानें और इसके खिलाफ कमर कसने की तैयारी करें!   आईएफटीयू (सर्वहारा) मजदूर-मेहनतकश साथियो!  फासीवाद क्या है? फासीवाद सांप्रदायिक नफरत, नस्लीय घृणा और उग्र राष्ट्रवाद पर आधारित एक घोर प्रतिक्रियावादी राजनीतिक मुहिम व आंदोलन का नाम है। फासीवादी तानाशाही क्या है? जब फासीवाद सतारूढ़ हो जाता है, तब फासीवादी तानाशाही का…

Read More

फासीवाद के खिलाफ लड़ाई पर फिर एक बार चर्चा 

[14-15 दिसंबर 2024 को दिल्ली में ‘रेडिकल वामपंथी ताकतों की अखिल भारतीय परामर्श बैठक’ हेतु अंग्रेजी पेपर का अनुवाद] पी आर सी, सीपीआई (एमएल) 1. फासीवाद की परिभाषा और वर्ग चरित्र जब फासीवाद सत्ता में होता है, तो यह वित्तीय पूंजी के सबसे प्रतिक्रियावादी, सबसे अंधराष्ट्रवादी और सबसे साम्राज्यवादी तत्वों की खुली आतंकवादी तानाशाही होता…

Read More

नई आर्थिक नीतियों के बारे में एक बार फिर से

 अजय सिन्हा | ‘यथार्थ’ पत्रिका (जनवरी-मार्च 2025) आम तौर पर 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार के दौर की आर्थिक नीतियों पर चर्चा होती है, तो प्राय: तत्कालीन भारतीय अर्थव्यवस्था के वास्तविक कार्यचालन (actual working) को उजागर करने पर हमारा ध्यान न के बराबर होता है। ध्यान महज नीतियों के अच्छे या बुरे होने पर…

Read More

बड़ी पूंजी (कॉरपोरेटों) के हक में आनन-फानन में किये जा रहे बिहार भूमि सर्वेक्षण पर रोक लगाओ!

भूमिहीनों, गरीबों को उजाड़ना बंद करो; भूमि पर उनका दावा बहाल करो! (बिहार में जारी वर्तमान भूमि सर्वेक्षण पर जन अभियान, बिहार द्वारा गांधी संग्रहालय, पटना में 9 जनवरी 2025 को आयोजित कन्वेंशन में पेश प्रपत्र।)  जन अभियान, बिहार बिहार में चल रहे (बढ़ी हुई समय अवधि के साथ) भूमि सर्वे में अफरातफरी की स्थिति…

Read More

‘फ्रीबीज-रेवड़ियां’ सिर्फ पूंजीपतियों को ही, गरीब इससे मुफ्तखोर बनते हैं! 

 संपादकीय | ‘यथार्थ’ पत्रिका (जनवरी-मार्च 2025) बजट व अन्य आर्थिक नीतियां – ‘फ्रीबीज-रेवड़ियां’ सिर्फ पूंजीपतियों-अमीरों को ही, गरीब इससे मुफ्तखोर बनते हैं! – फासीवादी दौर का ‘वेलफेयर’ मॉडल सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चुनावों के पहले मुफ्त चीजें या फ्रीबीज देने के राजनीतिक दलों के वादे पर नाराजगी जताई और कहा कि लोग काम…

Read More

सड़ता बीमार पूंजीवाद बोलने की जरा भी आजादी को सहन करने को कतई तैयार नहीं

 मुकेश असीम | सर्वहारा #71-73 (1 मार्च – 15 अप्रैल 2025) पूंजीवादी व्यवस्था का दावा रहा है कि उसने जनतंत्र कायम किया और सभी को अभिव्यक्ति का जनतांत्रिक अधिकार दिया है, हालांकि सच्चाई यह है कि पूंजीवाद में हर अधिकार वास्तव में सम्पत्तिशालियों के लिए ही होता है। संपत्तिहीन मजदूर मेहनतकश इन अधिकारों का प्रयोग…

Read More

PROLETARIAN STRATEGY AGAINST CASTE IDEOLOGY, CASTE OPPRESSION & CASTE SYSTEM

It is true, anti-caste struggle is needed inside class unity so that class struggle remains unpolluted by caste prejudice and caste mentality. It must become the acid test of real class unity. The real challenge – and the task of this convention – is to fuse anti-caste and anti-class struggle inside and outside the movement, in theory and in daily practice.

Read More

फासीवाद और मजदूर वर्ग का दायित्व

(मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA), दिल्ली द्वारा 12 अक्टूबर 2025 को ‘बढ़ता फासीवादी खतरा और मजदूर वर्ग‘ विषय पर अम्बेडकर भवन, दिल्ली में आयोजित कन्वेंशन में आईएफटीयू–सर्वहारा का वक्तव्य) I   मजदूर अक्सर पूछते हैं, फासीवाद क्या है? फासीवाद के बारे में सबसे पहली बात तो यही है कि यह पूंजीपति वर्ग की तानाशाही का…

Read More
Share on Social Media