फासीवादी दौर में महिलाओं पर बढ़ता उत्पीड़न और महिला मुक्ति का प्रश्न

30 दिसंबर 2024 को आसनसोल बार एसोसिएशन हॉल, पश्चिम बर्धमान, पश्चिम बंगाल में कॉमरेड सुनील पाल की 15वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर पीआरसी, सीपीआई (एमएल) तथा इफ्टू (सर्वहारा) द्वारा उपर्युक्त विषय पर आयोजित केंद्रीय कन्वेंशन में पेश आधार पत्र।  मूल दस्तावेज़ अंग्रेजी में है जिसका यह हिंदी में अनुवादित संस्करण है। भूमिका हाल के…

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नई आर्थिक नीतियों के बारे में एक बार फिर से

 अजय सिन्हा | ‘यथार्थ’ पत्रिका (जनवरी-मार्च 2025) आम तौर पर 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार के दौर की आर्थिक नीतियों पर चर्चा होती है, तो प्राय: तत्कालीन भारतीय अर्थव्यवस्था के वास्तविक कार्यचालन (actual working) को उजागर करने पर हमारा ध्यान न के बराबर होता है। ध्यान महज नीतियों के अच्छे या बुरे होने पर…

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गिरती आर्थिक वृद्धि व लाभ दर से तीव्र होते अंतर्विरोध फासीवादी तानाशाही को नग्न रूप लेने की ओर बढ़ा रहे हैं

संपादकीय, दिसंबर 2024 पूंजी का मानवद्रोही चरित्र ही ऐसा है कि उसका संकट उसे हमेशा ही ध्वंसात्मक दिशा में ले जाता है क्योंकि यह विनाश ही उसके लिए एक तात्कालिक राहत लाता है। कोविड के नाम पर निर्मम लॉकडाउन पूंजी के लिए ऐसी ही एक तात्कालिक राहत थी जब आर्थिक गतिविधियों के बंद होने से…

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PROLETARIAN STRATEGY AGAINST CASTE IDEOLOGY, CASTE OPPRESSION & CASTE SYSTEM

It is true, anti-caste struggle is needed inside class unity so that class struggle remains unpolluted by caste prejudice and caste mentality. It must become the acid test of real class unity. The real challenge – and the task of this convention – is to fuse anti-caste and anti-class struggle inside and outside the movement, in theory and in daily practice.

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जाति उन्मूलन कार्यक्रम की दिशा में

“जाति उन्मूलन का कार्यभार और मजदूर वर्ग का ऐतिहासिक मिशन” 6 अक्टूबर 2024 को अंबेडकर भवन, दिल्ली में सर्वहारा जनमोर्चा (प्रोलेतारियन पीपल्स फ्रंट) द्वारा आयोजित कन्वेंशन का आधार पत्र पूंजीपति व सर्वहारा के बीच मुख्य अंतर्विरोध के साथ ही भारतीय समाज में अन्य के साथ ही जाति अंतर्विरोध भी एक अहम कारक के रूप में…

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भाजपा को हराना जरूरी है, 

लेकिन क्रांतिकारी जन-उभार की सरकार ही फासीवाद का अंत कर सकती है  संपादकीय, अप्रैल 2024 पूरे देश में चुनाव की सरगर्मियां शबाब पर हैं। जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहा है, देश के राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। हम देख सकते हैं कि जैसे ही चुनाव ने जन-सरोकार के मुद्दों के इर्द-गिर्द घुमना शुरू…

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अक्‍टूबर क्रांति और इस रास्‍ते पर चलने की जरूरत के बारे में चंद बातें

संपादकीय, सर्वहारा, 30 अक्टूबर 2025 अक्‍टूबर क्रांति – मजदूर-मेहनतकश वर्ग की समाजवादी क्रांति – 25 अक्‍टूबर 1917 को शुरू हुई और अगले दिन यानी 26 अक्‍टूबर की शाम तक संपन्‍न भी हो गई थी। मजदूर-मेहनतकश वर्ग ने पूंजीपति वर्ग की सत्ता उलट दी थी और लेनिन द्वारा निर्मित बोल्‍शेविक पार्टी के नेतृत्‍व में सत्ता अपने…

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बिहार चुनाव परिणाम 

जोड़-तोड़ व धर्म-जाति के चुनावी समीकरणों की राजनीति से नहीं, मजदूरों मेहनतकशों उत्पीड़ित जनता की मुक्तिकामी राजनीति से ही फासीवाद की पराजय मुमकिन संपादकीय, सर्वहारा, 1-30 नवंबर बिहार चुनाव परिणामों में बीजेपी की बड़ी जीत से उन्हें भारी धक्का लगा है, जो इस चुनाव में विपक्षी महागठबंधन की ‘तय विजय’ के भरोसे फासीवादी बीजेपी को…

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बड़ी पूंजी (कॉरपोरेटों) के हक में आनन-फानन में किये जा रहे बिहार भूमि सर्वेक्षण पर रोक लगाओ!

भूमिहीनों, गरीबों को उजाड़ना बंद करो; भूमि पर उनका दावा बहाल करो! (बिहार में जारी वर्तमान भूमि सर्वेक्षण पर जन अभियान, बिहार द्वारा गांधी संग्रहालय, पटना में 9 जनवरी 2025 को आयोजित कन्वेंशन में पेश प्रपत्र।)  जन अभियान, बिहार बिहार में चल रहे (बढ़ी हुई समय अवधि के साथ) भूमि सर्वे में अफरातफरी की स्थिति…

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खस्ताहाल मध्य वर्ग और उसकी गिरती आय की स्वीकारोक्ति

 संपादकीय | सर्वहारा #71-73 (1 मार्च – 15 अप्रैल 2025) इस संबंध में देश के प्रतिष्ठित अखबारों (जैसे कि इकोनॉमिक टाइम्स और फाइनेंशियल टाइम्स) में छपी पूंजीवादी थिंक-टैंक के एक सदस्य सौरभ मुखर्जी (मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी) की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के मध्य वर्ग1 की आर्थिक स्थिति…

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