पटना का भोगीपुर मजदूर आन्दोलन

पटना का भोगीपुर मजदूर आन्दोलन

October 17, 2021 0 By admin

आई.एफ.टी.यू. (सर्वहारा)

असंगठित क्षेत्र के मजदूर भी क्रांतिकारी रास्ता दिखा और बना सकते हैं

उचित मुआवज़े की लड़ाई से उठे भोगीपुर आंदोलन की जीत के बाद इफ्टू-सर्वहारा संबद्ध ‘निर्माण मजदूर संघर्ष यूनियन’ द्वारा जारी परचा (21 सितंबर 2021)


पटना के मजदूरों से आह्वान

भोगीपुर मजदूर आन्दोलन की शानदार क्रांतिकारी परम्परा को आगे बढ़ाएं!

फैसलाकून मजदूर आंदोलन की विराट लहर पैदा करें!

दो दिनों पहले (19 सितंबर 2021 को) पटना के निर्माण मजदूरों ने एक ऐतिहासिक जीत हासिल की। एक ऐसी जीत जो मालिक वर्ग की कल्पना से परे थी। भोगीपुर मजदूर आंदोलन [निर्माण मजदूर रामधनी यादव की निर्माणाधीन बिल्डिंग से गिर कर हुई मृत्यु के बाद उचित मुआवजे की लड़ाई] में पटना के निर्माण मजदूरों ने अभूतपूर्व साहस, एकता और धैर्य का परिचय देते हुए परिजनों को मालिक से छः लाख का मुआवजा दिलवाया। श्रम विभाग के अधिकारियों ने भी एक लाख मुआवजा देने का वादा किया है। इस लड़ाई में मजदूरों द्वारा दिखाई गई क्रांतिकारी पहलकदमी ने यह बता दिया है कि असंगठित क्षले के मजदूरों में वर्गीय एकता की चिंगारी प्रज्वलित होने के बाद वे मालिक वर्ग को घुटनों पर ला सकते हैं। भोगीपुर मजदूर आंदोलन में भी मालिक का अमानवीय और संवेदनहीन रूप देखने के बाद मजदूरों ने ठान लिया कि बिना मुआवजा लिए वापस नहीं जाएंगे। उसके बाद क्या था, मजदूरों ने ना भूख देखी, ना थकान। दिन भर हाड़-तोड़ मेहनत करके आए मजदूर साईट गेट के सामने की कच्ची सड़क पर मृतक के परिवार व यूनियन के साथियों के साथ उस सुनसान इलाके में भूखे-प्यासे रात भर डटे रहे। देर रात जब घटनास्थल पर पुलिस प्रशासन पहुंची तो नेताओं की गिरफ्तारी और लाठीचार्ज के खतरे के मुंह में भी मजदूर तनिक भी नहीं घबराए और असीम साहस और समर्पण का परिचय देते हुए ऐलान किया कि साथी सौजन्य और आकांक्षा की उपस्थिति में मजदूर की पत्नी अगर यूनियन के किसी एक साथी को भी गिरफ्तार किया गया तो तमाम सैकड़ों मजदूर भी गिरफ्तारी देंगे। ये सुन कर पुलिस को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। सुबह होते होते घटनास्थल पर मजदूरों का तांता लग गया। मजदूर खुद से ही पिक अप, ऑटो, आदि करके घटनास्थल पर आने लगे। बगल के गांव व मजदूर बस्तियों के मजदूर व महिलाएं भी खबर मिलते ही स्वतःस्फूर्त ही घटनास्थल पहुंच गए मजदूरों व समर्थकों की आती लहरों और उनके द्वारा लगाए जा रहे मजदूर एकता जिंदाबाद के नारों ने वहां पहले से मौजूद रातभर जागे, भूखे और थके मजदूरों में जो ऊर्जा और ताकत का जो संचार किया उसे उनके भावुक चेहरे और आंसूओं से डबडबाई आंखों में साफ तौर से देखा जा सकता था। मजदूरों की व्यापक एकता से उल्लाहित मन और ख़ुशी से निकले आंसूओं की एक-एक बूंद ने उसी समय मानो यह घोषणा कर दी थी कि मजदूरों की जीत निश्चित है और मजदूर यहां से बिना उचित मुआवजा लिए वापस नहीं जाएंगे और जिस मालिक ने “भाग जाओ नहीं तो तुम सबको भी मार के फेंक देंगे” कहते हुए मालिक होने के अपने निकृष्ट व घिनौने अभिमान का परिचय दिया था उसे मज़दूर अवश्य उचित सबक सिखाएंगे। और सच में मज़दूरों ने यह कर दिखाया।

साथियों! यह लड़ाई पटना के मज़दूर वर्ग आंदोलन के इतिहास में आगे चलकर एक मील का पत्थर साबित होगा और इसकी प्रेरणा से मज़दूर इससे भी अधिक प्रेरणादायी लड़ाइयों का उदाहरण पेश करेंगे हमें इसमें कोई संदेह नहीं है। इस संघर्ष ने असंगठित मजदूरों की संगठित ताकत और वर्गीय चेतना को निखारने व उभारने का काम किया है। मजदूर भाइयों! यह लड़ाई आखरी नहीं है, बल्कि एक शुरुआत है जहां मजदूरों ने मुनाफे की होड़ में उसके खून की प्यासी इस व्यवस्था के खिलाफ एक मुक्कमल पड़ाव है। यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक मजदूरों को कार्यस्थल पर उचित सुरक्षा की गारंटी नहीं हो जाती, उनके अधिकारों को खत्म करने की साजिश बंद नहीं हो जाती, जब तक मालिकों द्वारा उन्हें कीड़े-मकोड़ों की तरह कुचलना बंद नहीं किया जाता, जब तक उनके रोजगार की गारंटी नहीं होती। अगर इस दुनिया को बनाने वाले मजदूर अपने अंदर की असीम ताकत को पहचान लें, जिसकी एक छोटी झलक भोगीपुर मजदूर आंदोलन ने दिखाई है, तो वे ये दुनिया जीत सकते हैं। हमें विश्वास है कि मजदूरों के इन्ही संघर्षो से जली चिंगारियां मशाल बन कर एक नए, सुंदर, शोषणमुक्त समाज का सूरज प्रज्वलित करेंगी। एकबार फिर से, भोगीपुर के संघर्ष में शामिल सभी मजदूरों को, जिनके बिना ये संघर्ष चलना नामुमकिन था, हम जीत की बधाई देते हैं और सभी साथियों को दिल से सलाम करते हैं और उनके द्वारा रची गई इस क्रांतिकारी परम्परा को बरकरार रखने का आह्वान करते हैं!